नचना (कहानी) ~ मेवालाल
लोगों के पास खेती करने के लिए जमीन नहीं थी। गाँव के सभी लोग हरवाही करते थे। पिता और पिता के पुत्र दोनों हरवाही करते थे। हल बैल किसानों के होते थे और जमीन मालिक की होती थी। खेत को जोतते बोते थे। फसल की रखवाली, कटाई और मड़ाई करते थे। किसान मात्र हल नहीं चलाता था बल्कि उनके द्वार पर दिन रात लगे रहते थे। घर परिवार की उपेक्षा भी करनी पड़ती थी। फसल तैयार होने पर मिला पारिश्रमिक से परिवार के सभी लोगों का पेट नहीं भरता था। जो मिलता था वह अगली फसल तैयार होने तक नहीं चलता था। मालिक मात्र बड़े संपदा के मालिक न थे बल्कि लोगों के दिमागों के मालिक थे। कोई भी काम काज होता था तो लोग उन्हीं से सलाह लेने आते थे। उन्हीं के दया पर सम्पन्न होता था। लोगों शादी आदि पर अनाज को खर्च करने के लिए अपना पेट काट काट कर अनाज बचाते थे। फिर भी कम ही पड़ जाता था। लोगों के तन पर एक कपड़ा बड़ी मुश्किल से नसीब होता था। पाँच साल तक लड़के नंगे ही रहते थे। सम्मान की बात लोगों में न थी। बात थी तो किसी तरह जिंदगी काटने की। भीखू ऐसे सब लोगों में से एक था। जीवन की एक तिहाई उमर बीत गई थी। मालिक की सेवा करते हुए अपने माता-पिता...