मुझसे तेरा नाम बड़ा है (गीत) ~ मेवालाल
मेरी हैसियत क्या योग्यता
कुछ नहीं उसके आगे
कुदरत ने करिश्मा से
उसे लम्बे समय में गढ़ा है।
न सुनने और कहने के बीच
मन दुविधा में बहुत है
अन्दर है सृजन कला
यह जीवन का बसंत ऋतु है।
दिल को दिल से न जाने
यहाँ उमर सिर पे चढ़ा है।/मुझसे तेरा नाम बड़ा है।
मेरी उपस्थिति मे गर वह
अपनी मूल्य जान पाये
भावनाओं से सम्मानित करे
मुझे अपनी पहचान बताये
दिल के पास जुवान नहीं है
लेकिन समर्पण को अड़ा है।
मुझसे तेरा नाम बड़ा है।
ताज लगाके सिहांसन बिठाऊं जो
कही न कर दे अपना निरादर
दिल में जो है कह देता हूँ
पर सच कहने से लागे डर।
मेरा यश सम्मान राज
खो न जाये कहीं आकर्षण
जो पल पल मुझमें बढ़चढ़ा है।/मुझसे तेरा नाम बड़ा है।
बड़े लोग शक्ति संपन्न
नौकर चाकर की कहां कमी
सब कुछ पहले से उपलब्ध
उनकी चाहत में विलासिता रमी।
एक बात मन में ख़लती
उनके पास राजाओं की कमी
चमचमाते दुनिया में स्वयं होकर
एक स्थिर फीका दूर खड़ा है।/ मुझसे तेरा नाम बड़ा है।
मेवालाल
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