बीएचयू प्राचार्यो पर (दोहा) – मेवालाल
प्रेम यस उमर बाढ़े, बाते नव सोच अमेल। जहां परंपरा रूढ़ि हावी, शोभे प्रियंका झा अकेल।। संत स्वभाव ज्ञानी विनम्र, सहृदय सिंहासन श्रृंग। मुस्कान साझा छात्र मित्र, अद्भुत प्रभाकर सिंह।। पहिचाने धर्महि कर्महि जोड़े,अदमियत समताहि एक रूप। जौ नी के सब पहिने कहि, जनेऊ त्यागे वशिष्ठ अनूप।। स्वायत्तहि सोच व्यक्त, हित समता संवादए मेल। कहां बंजरहि फूल सम, किंगसन सिंह पटेल।। जाने सब विचार बनावे, मानवता प्रस्थिति बड़ राखी वादहि सत्यहि शक्ति सब, वाल्टेयर आशीष त्रिपाठी।। मंद गति निश्चित अव्यस्त, चले व्यवस्थापक एक दीदार। बाते अगर्व प्राप्ति अपरिग्राही, सामाजिक सदानंद साही सर।। जेहि सम्मुख वजूद रहे मान, न पदय मनोदृष्टि नेक। जीवन शैली संभ्रांत विरोधे, विंध्यांचल यादव एक। समताहि त्यागे रीति परंपरा, औ श्रेष्ठहि विचार। जन देशवाद परिपेक्ष्य मंह, राणा कुमार झा तैयार। मेवालाल शोधार्थी हिंदी विभाग बीएचयू वाराणसी यूपी पिन 221005, 7753019742